जेट एयरवेज संकट: कंपनी को जल्द 3400 करोड़ की जरूरत

जेट एयरवेज कंपनी इन दिनों कठिन समय से गुजर रही है। कंपनी बुरी तरह से कर्ज में डूबी हुई है और ऐसा कहा जा रहा है कि कंपनी नें निवेशकों का काफी पैसा डूबा दिया है।

एक समय था जब जेट एयरवेज भारतीय हवाई जहाज के बाजार में सबसे आगे था। लेकिन पिछले कुछ समय में बढ़ती तेल की कीमतों और नए प्रतिद्वंदी के आने से कंपनी बुरी तरह से पीछे रह गयी है।

पिछले कुछ दिनों से कंपनी लगातार गलत ख़बरों से घिरी हुई है।

सबसे पहले यह खबर आई थी कि जेट एयरवेज को अपनी कमाई बरक़रार रखने के लिए कीमतों में भारी कटौती करने की जरूरत है। कंपनी नें हालाँकि इस रिपोर्ट को नामंजूर कर दिया था।

इसके बाद अब कंपनी नें इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही की अपनी कमाई बताने से इंकार कर दिया है। इस खबर के चलते आज जेट एयरवेज के शेयर 15 फीसदी से ज्यादा नीचे गिर गए हैं।

2011 के बाद से कंपनी के शेयर की यह सबसे बुरी हालत है। इसका मुख्य कारण कंपनी की कमाई में कमी और कर्ज में वृद्धि है।

जाहिर है पिछले एक दशक में जिस प्रकार सस्ती एयरलाइन्स इंडिगो, गोएयर, स्पाइसजेट बड़ी तेजी से बड़ी बनी हैं, बड़ी कंपनियां नीचे भी गिरी हैं।

उदाहरण के तौर पर, आप किंगफ़िशर को ले सकते हैं। आज से सिर्फ 7-8 साल पहले यह कंपनी भारतीय एविएशन क्षेत्र में सबसे जबरदस्त कंपनी मानी जाती थी। आज कंपनी बंद होने के कगार पर है। इसके अलावा एयर इंडिया की हालत भी काफी खस्ता चल रही है। कम किराए की वजह से कंपनी का खर्चा ही नहीं निकल रहा है।

जेट एयरवेज की चुनोतियों पर विशेषज्ञ राहुल कपूर का कहना है, “तेल की बढ़ती कीमतों नें उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। वे पहले से ही अन्य कारणों से काफी पिछड़ गए हैं।”

ऐसा माना जाता है कि विमानन क्षेत्र में भारत सबसे कठिन बाजार है। यहाँ कंपनियों को मध्य वर्गीय लोगों को लुभाने के लिए काफी सस्ती कीमतों पर टिकट बेचनी पड़ती हैं। ऐसे में मुनाफे का दर बहुत कम है।

किंगफ़िशर एयरलाइन को विजय माल्या नें 2005 में शुरू किया था। कंपनी 2012 तक एक बेहद सफल कंपनी थी, लेकिन फिर कंपनी पर कर्जा इतना बढ़ गया था कि कंपनी इससे उबर नहीं सकी थी।

कितना कर्जा है जेट एयरवेज पर?

मुंबई स्थित जेट एयरवेज पर इस समय कुल 1.4 अरब डॉलर यानी लगभग 94 अरब रूपए का कर्जा है। आपको बता दें कि कंपनी की जितनी कमाई है उससे 55 गुना ज्यादा कंपनी का कर्जा है। यह कर्जा पिछले सिर्फ एक साल में 10 गुना से ज्यादा बढ़ गया है।

कंपनी हालाँकि एक साल पहले तक प्रॉफिट में थी। सिर्फ पिछले साल से ही कंपनी नें घाटा दिखाना शुरू किया है।

कल देर रात कंपनी की ओर से बयान आया था कि ऑडिट टीम नें कंपनी के रिजल्ट घोषित करने की मंजूरी नहीं दी है। इसके कारण आज कंपनी के शेयर बुरी तरह से गिर गए।

ब्लूमबर्ग के विशेषज्ञों की मानें तो जेट एयरवेज को घाटे से निकलने के लिए कम से कम 500 मिलियन डॉलर यानी लगभग 3400 करोड़ रूपए की जरूरत है। इसके अलावा कंपनी को अलग से 400 मिलियन डॉलर चाहिए, जिससे कंपनी वर्तमान स्थिति से उबर सके।

उन्होनें बताया, “कंपनी इसे ऐसे कर सकती है कि वह घरेलु बाजार में अपने खर्चे कम करे और अपने विभिन्न विमानों को किराए पर दे या बिक्री करे। यदि कंपनी दो साल अच्छे से काम करती है, तो वह दो साल में इससे बाहर आ सकती है।”

जेट एयरवेज के शेयर में जबरदस्त गिरावट

जेट एयरवेज का शेयर सिर्फ इस साल में 66 फीसदी तक गिर गया है। इसे विमानन क्षेत्र में सबसे ज्यादा गिरने वाला शेयर माना जा रहा है।

जेट एयरवेज के चेयरमैन नरेश गोयल नें हाल ही में कहा था, “हमने जो पैसा और इज्जत खोयी है, उसे हमें वापस पाना है। मैं बहुत शर्मिंदा हूँ कि हम अपने निवेशकों के साथ न्याय नहीं कर सके, जो इस घड़ी में भी हमारे साथ खड़े थे।”

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