शनिवार, दिसम्बर 14, 2019

चीनी शिविरों में 8 लाख से 20 लाख धार्मिक अल्पसंख्यक नज़रबंद है: अमेरिका

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कविता
कविता ने राजनीति विज्ञान में स्नातक और पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। वर्तमान में कविता द इंडियन वायर के लिए विदेशी मुद्दों से सम्बंधित लेख लिखती हैं।

चीन में धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ कठोर रणनीति अपनाई जा रही है। हाल ही में चीन में कई धार्मिक स्थलों को ध्वस्त और धार्मिक चिन्हों को मिटाया गया था। अमेरिका के ट्रम्प प्रशासन ने सांसदों से कहा कि चीन ने 8 लाख से 20 लाख धार्मिक अल्पसंख्यक नज़रबंद शिविरों में कैद हैं। ट्रम्प प्रशासन ने चीन के शिनजियांग प्रांत में घोर मानव अधिकार उल्लंघन पर गंभीर चिंता व्यक्त की है।

संसाधन धनी शिनजियांग प्रांत में अल्पसंख्यक उइगर मुस्लिमों की स्थिति दयनीय हैं, वे अन्य प्रान्तों से बहुसंख्यक हान चीनियों के वहां बसने का विरोध करते हैं। चीन ने हजारों संजातीय उइगर मुस्लिमों को कैद में रखने के लिए कई गोपनीय नज़रबंद शिविरों का निर्माण कराया है।

नज़रबंदियों के परिवार को नहीं सूचना

कांग्रेस की सुनवाई के दौरान स्कॉट बुस्बी ने बीजिंग पर आरोप लगाया कि वह विश्व के सभी दमनकारी विभागों की नीतियों का समर्थन करता है।

उन्होंने कहा कि अमेरिकी सरकार चीनी हरकतों पर अप्रैल 2017 से नज़र बनाये हुई थी, आंकड़ों के मुताबिक चीनी विभाग ने कम से कम 8 लाख और अधिकतम 20 लाख उइगर मुस्लिमों, संजातीय कजाख और अन्य मुस्लिम सदस्यों को नज़रबंद कैद में रखा गया है।

स्कॉट बुस्बी ने बताया कि नज़रबंद कैदियों में से अधिकतर को बिना जुर्म के रखा गया है, कैदियों के परिवार को इसकी जरा सी भी सूचना नहीं है। हालांकि चीन इन आरोपों से इनकार करता रहा है।

चीनी विभागों के मुताबिक यह शिविर प्रशिक्षण केंद्र हैं। ख़बरों के मुताबिक इन शिविरों में कई उइगर बुद्धिजीवी और सेवानिवृत्त पेशेवर भी नज़रबंद हैं। अमरीका ने बताया कि इन शिविरों का मकसद कैदियों को इस्लाम छोड़ने पर मजबूर करना और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का गुणगान करवाना है।

शिविरों के बाहर भी आसान नहीं ज़िदगी

उन्होंने कहा कि इन शिविरों के बाहर भी अल्पसंख्यकों की ज़िन्दगी आसान नहीं है। हर इलाके में प्रवेश और निकास चेकपॉइंट पर पुलिस का पहरा है। उन्होंने कहा कि कई मस्जिदों को ध्वस्त या बंद कर दिया गया है और कई स्थलों को चीनी कम्युनिस्ट केंद्र में तब्दील कर दिया गया है। रेपोर्त्ब के मुताबिक चीन उइगर, कजाख जैसे अल्पसंख्यक समूहों को वापस चीन भेजने के लिए अन्य देशो पर दबाव बनती है।

उन्होंने कहा कि जब यह धार्मिक अल्पसंख्यक वापस देश लौटते हैं तो चीन इनका शोषण और अत्याचार करता है। अमेरिकी सांसदों ने चीनी दमकारी नीति पर मुस्लिम देशों की चुप्पी की आलोचना की है।

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