किसान हितैषी बन नरेंद्र मोदी के खिलाफ सियासी जमीन तलाश रहे हैं राहुल गाँधी

गुजरात विधानसभा चुनाव
जमीनी मुद्दों को आधार बना रहे राहुल गाँधी

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी इन दिनों राजनीति में बहुत सक्रिय नजर आ रहे हैं। नॉर्वे की विदेश यात्रा से लौटने के बाद राहुल गाँधी ने अहमदाबाद जाकर गुजरात विधानसभा चुनावों की तैयारियों का जायजा लिया और पार्टी कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद किया। अहमदाबाद से लौटकर उन्होंने दिल्ली स्थित अपने आवास पर बिहार कांग्रेस के विधायकों से निजी तौर पर मुलाकात की। बिहार कांग्रेस के 27 विधायकों से निजी तौर पर मुलाकात करने में उन्हें 2 दिन का समय लगा और उन्होंने बिहार कांग्रेस में उठ रहे बगावत के सुरों की तह तक जाने के लिए मामले का गहन विश्लेषण किया। शुक्रवार, 8 सितम्बर को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी महाराष्ट्र दौरे पर थे जहाँ उन्होंने मराठवाड़ा क्षेत्र के जिलों में किसानों से मुलाकात की और किसानों की रैली को सम्बोधित भी किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “कांग्रेस मुक्त भारत” की ऐसी परिकल्पना देश की जनता के सामने रखी है कि यह केंद्र से निकल कर धीरे-धीरे हर राज्य तक पहुँच रही है। भाजपा एक-एक कर देश के हर सूबे को हथियाती जा रही है और कांग्रेस का सूफड़ा साफ होता जा रहा है। ऐसे कठिन समय में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी देश की सियासत में अपनी भूमिका बनाने को बेताब दिख रहे हैं। बीते कुछ वक्त से कांग्रेस के “युवराज” अपने प्रचार और जनसम्पर्क अभियानों को किसानों पर केंद्रित रख रहे हैं। राहुल गाँधी महाराष्ट्र में भी किसानों की लगातार बढ़ती आत्महत्या का मामला उठाने गए थे। राहुल गाँधी किसानों के मुद्दे को ठीक उसी तरह प्रचारित कर रहे हैं जैसे भाजपा ने राम मंदिर मुद्दे को आज से करीब 2 दशक पहले प्रचारित किया था और उसे इसके दम पर सत्ता हाथ भी लगी थी।

किसान वोट बैंक साधने में जुटे राहुल

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने मोदी सरकार को सूट-बूट की सरकार का तगमा दे रखा है। नरेंद्र मोदी के देश के शीर्ष उद्योगपतियों के साथ सम्बन्धों को अक्सर मीडिया भी तवज्जो देता है। अभी तक मोदी सरकार की सभी योजनाएं आम जनता से अधिक उद्योगपतियों और व्यवसायियों के लिए फायदेमंद रही है। ऐसे में राहुल गाँधी के लिए अपना पक्ष मजबूत करना का एक उचित साधन मीडिया हो सकता है। वर्तमान परिदृश्य में देश की राजनीति का जो रुख है उसे देखते हुए सिर्फ किसान वोट बैंक ही एक ऐसा मजबूत आधार है जिसपर राहुल गाँधी नरेंद्र मोदी के सामने खुद को प्रतिद्वंदी की तरह खड़ा कर सकते हैं।

किसानों की आत्महत्या और कर्जमाफी को बना रहे हैं मुद्दा

हालिया कुछ वर्षों के भीतर देश में किसानों की आत्महत्या के मामलों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी किसानों की बढ़ती आत्महत्या के मुद्दे को राष्ट्रीय मुद्दा बनाकर मोदी सरकार को घेरने की फिराक में जुटे हैं। साथ ही किसानों की कर्जमाफी की मांग को वह लगातार दोहराते रहे हैं। हाल में ही उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों का कर्ज माफ किया था जिसका श्रेय लेने में राहुल गाँधी पीछे नहीं हटे। उन्होंने कहा था कि उनके प्रदर्शनों की वजह से किसानों का कर्ज माफ किया गया है। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा के दौरे पर राहुल गाँधी ने महाराष्ट्र में किसानों की बढ़ती आत्महत्या के लिए सत्ताधारी भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि सरकार ने इस गंभीर मामले पर संवेदनहीन रवैया अपनाया हुआ है।

राहुल गाँधी ने राज्य और केंद्र सरकार से किसानों का कर माफ किए जाने की भी मांग की। उन्होंने कांग्रेस सरकार में उठाए गए कर्जमाफी के कदम की भी याद दिलाई। केंद्र में कांग्रेस सरकार के पहले शासनकाल के दौरान किसानों की कर्जमाफी हुई थी। राहुल गाँधी इसी मुद्दे को बार-बार उठाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। राहुल गाँधी ने कहा कि अगर सरकार बड़े-बड़े उद्योगपतियों का कर्ज माफ कर सकती है तो फिर वह देश को भोजन देने वाले अन्नदाताओं का कर्ज क्यों नहीं माफ करती?

“देश को उद्योगपतियों की ही नहीं किसानों की भी जरुरत है”

महाराष्ट्र कांग्रेस के गढ़ कहे जाने वाले नांदेड़ में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने मोदी सरकार पर कॉर्पोरेट हितैषी होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है जिसकी आत्मा गाँवों में बसती है। यहाँ जीवन का मुख्य आधार कृषि है लेकिन सरकार किसानों से उनके जीवन का आधार छीनती जा रही है और इसी वजह से किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश को उद्योगपतियों के साथ-साथ किसानों की भी जरुरत है। मोदी सरकार को इस विषय में ध्यान देना चाहिए। सिर्फ उद्योगपतियों के सहारे ही देश नहीं चलता।

किसान आन्दोलन में पहले भी उतर चुके हैं राहुल

यह पहली बार नहीं है जब राहुल गाँधी किसानों के समर्थन में आन्दोलन में उतरे हैं। इससे पूर्व वह कई बार किसान आन्दोलन में महती भूमिका निभा चुके हैं। मायावती के शासनकाल के दौरान उत्तर प्रदेश के भत्ता परसौल में जमीन अधिग्रहण के विरोध में किसान आन्दोलन कर रहे थे। पुलिस ने भत्ता परसौल गाँव की चारो ओर से नाकाबंदी कर रखी थी। इसके बावजूद राहुल गाँधी बाइक पर सवार होकर किसानों के बीच पहुँच गए थे। उत्तर प्रदेश में हालिया सम्पन्न विधानसभा चुनावों के वक्त राहुल गाँधी ने 2500 किमी की किसान यात्रा की थी। इस दौरान वह किसानों के साथ बैठकर उनकी समस्यायों पर चर्चा करते थे। चुनावों के वक्त उनकी “खाट पर चर्चा” बैठक काफी मशहूर हुई थी।

किसानों के समर्थन में कई राज्यों में निकाली थी पदयात्रा

राहुल गाँधी ने बीते वर्ष देश के कई राज्यों का दौरा किया था। किसानों की लड़ाई को ताकत के साथ लड़ने के लिए उन्होंने चिलचिलाती धुप में उत्तर से दक्षिण भारत तक कई राज्यों में पद यात्राएं निकाली। इस पद यात्रा की शुरुआत पंजाब से हुई थी जो बाद में महाराष्ट्र के विदर्भ, तेलंगाना और केरल में मछुआरों की समस्याओं के समर्थन में भी हुई। राहुल गाँधी ओलावृष्टि, बेमौसम बरसात, अतिवृष्टि प्रभावित उन किसानों के घरों में भी गए जहाँ किसी ने प्राकृतिक आपदा की वजह से आत्महत्या कर ली थी।

तमिलनाडु के किसानों के प्रदर्शन के दौरान राहुल गाँधी जंतर-मंतर पर भी उनके समर्थन के लिए पहुँचे थे। मोदी सरकार के भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन के प्रस्ताव के खिलाफ राहुल गाँधी ने आन्दोलन छेड़ा था और अलीगढ़ के टप्पल गाँव जाकर आन्दोलन कर रहे किसानों का समर्थन भी किया था। मोदी सरकार को इसके बाद भूमि अधिग्रहण बिल में प्रस्तावित संशोधन को वापस लेना पड़ा था। राहुल गाँधी लगातार कांग्रेस को मजबूत करने के लिए देश की आम जनता से जोड़ने वाली जड़ें तलाश रहे हैं। उम्मीद है किसानों और शोषितों की लड़ाई के माध्यम से राहुल गाँधी कांग्रेस को पुनर्जीवित करने में सफल होंगे और आगामी चुनावों में भाजपा को मोदी लहर के खिलाफ एक मजबूत विपक्ष का एहसास कराएंगे।