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    उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव

    उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित निकाय चुनाव को लेकर सभी पार्टियों की धड़कन बढ़ी हुई है। कानपुर निकाय चुनाव में अपनी जीत का दावा कर रही भाजपा की मुश्किलें अब लगातार बढ़ती दिख रही है। इसके बावजूद पार्टी अपनी जीत का हैट्रिक लगाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है। उत्तर के प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निकाय चुनाव का बिगुल भले ही अयोध्या से फूँका हो, लेकिन चुनावी दृष्टिकोण से कानपुर भी उनके लिए एक अहम क्षेत्र है।

    इस बार कानपुर निकाय चुनाव पहले से काफी दिलचस्प हो गया है। उत्तर प्रदेश में इससे पहले कभी बसपा ने दावेदारी नहीं की थी। लेकिन इस बार बहुजन समाज पार्टी के चुनावी मैदान में उतरने से सभी पार्टियां सतर्क हो गई है। कानपुर एक बड़ा शहरी क्षेत्र है और यह उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा शहरी इलाका भी है। निकाय चुनाव को लेकर कानपुर में सियासत लगातार गरमा रही है।

    भाजपा कानपुर में लगातार दो निकाय चुनावों से जीत हासिल करती आई है। इस चुनाव में भाजपा को थोड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि कानपुर शुरू से समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है। यहाँ कुल दस विधानसभा क्षेत्र है जिसमें से पांच पर सपा का अधिकार है। इस क्षेत्र में समाजवादी पार्टी की पकड़ काफी मजबूत मानी जाती है। अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा कानपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में अपना अधिकार जमाए हुए है वहीं शहरी इलाकों में भाजपा का वर्चस्व कायम है।

    कानपुर से लोकसभा सांसद भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी है। 2014 के लोकसभा चुनाव में मुरली मनोहर जोशी ने यहाँ जीत दर्ज की थी। कानपुर हिन्दू बाहुल्य क्षेत्र है और यहाँ की 74% आबादी हिन्दुओं की है। मुस्लिम आबादी केवल 20% है जिसका फायदा बीजेपी को मिलता है। लेकिन इस बार भाजपा निकाय चुनाव में मुस्लिम उम्मीदवारों को भी चुनावी मैदान में उतार रही है।

    माना जा रहा है कि यूपी निकाय चुनाव सीएम योगी के लिए अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। कानपुर निकाय चुनावों में भाजपा हैट्रिक लगाने के इरादे से उतरी है। भाजपा आलाकमान ने उत्तर प्रदेश निकाय चुनाव का जिम्मा योगी को सौंपा है और उनके कन्धों पर भाजपा की नैया पार लगाने की जिम्मेदारी है। पिछले दिनों योगी ने कानपुर में सभा को सम्बोधित करते हुए उत्तर प्रदेश की पूर्ववर्ती सपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था कि सपा सरकार अयोध्या जाने से डरती थी, लेकिन जब से भाजपा की सरकार बनी है तब से मैं पाँच बार अयोध्या का दौरा कर चुका हूँ।

    उन्होंने अपने भाषण में संकल्प पत्र का जिक्र करते हुए कहा कि अगर हमारी पार्टी निकाय चुनाव में जीत दर्ज करती है तो फ्री वाईफाई, शहर के बड़े बाजारों में पिंक शौचालय और शहर में पानी की बेहतर सुविधा मुहैया कराएगी। निकाय चुनाव को लेकर योगी ने पार्टी कार्यकर्त्ता और पदाधिकारियों को सतर्क कर दिया है। कानपुर के वर्तमान मेयर जगत वीर सिंह द्रोणा हैं जो भाजपा से सम्बन्ध रखते हैं। लेकिन इस बार कानपुर में मेयर की सीट महिलाओं के लिए आरक्षित है। इसको देखते हुए भाजपा ने प्रमिला पाण्डेय को मेयर प्रत्याशी घोषित कर दिया है। वहीं समाजवादी पार्टी ने माया गुप्ता को प्रत्याशी चुना है और कांग्रेस पार्टी की तरफ से वंदना मिश्र प्रत्याशी है।

    2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने गोविन्द नगर, आर्य नगर, कानपुर छावनी और महाराजपुर जैसे शहरी इलाकों में अपनी जीत दर्ज की थी। लेकिन इस बार बहुजन समाज पार्टी के चुनाव में आ जाने से बीजेपी को इन सीटों पर मुश्किल का सामना करना पड़ सकता है। भाजपा अपने पुराने एजेंडे को ही चुनाव में इस्तेमाल कर रही है वह हिंदुत्व के मुद्दे पर ही निकाय चुनाव लड़ना चाहती है। खास तौर पर भाजपा कानपुर में हिंदुत्व का मुद्दा बरकरार रखना चाहती है। इसका मुख्य कारण कानपुर का हिन्दु बाहुल्य क्षेत्र होना है।

    कानपुर का क्षेत्रफल 403 वर्ग किलोमीटर है और यहाँ की कुल जनसंख्या 27,67,350 लाख है। सम्पूर्ण भारत के शहरी क्षेत्रों में कानपुर का बारहवाँ स्थान है। यहाँ की साक्षरता दर 83% है और लिंग अनुपात 852 है। अब यह देखना दिलचस्प होगा की क्या भाजपा हिंदुत्व के मुद्दे को आधार बनाकर कानपुर में जीत की हैट्रिक लगा पाती है।