ईरान में अमेरिका अपने एयरक्राफ्ट और सेना की तैनाती करेगा: जॉन बोल्टन

अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलहाकार

अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने रविवार को कहा है कि “ईरान में अमेरिका अपने स्ट्राइक ग्रुप और बॉम्बर टास्क फाॅर्स की तैनाती में जुटा हुआ है। यह तेहरान के लिए स्पष्ट और अचूक सन्देश है कि यदि वांशिगटन के खिलाफ कोई कार्रवाई की गयी तो उससे बेरहमी से निपटा जायेगा।”

अमेरिकी सेना की तैनाती

गार्डियन के मुताबिक धमकियों और तनाव के बढ़ने के मध्य अमेरिका सेंट्रल कमांड क्षेत्र में यूएसएस अब्राहम लिंकन कर्रिएर स्ट्राइक ग्रुप और एक बॉम्बर टास्क फाॅर्स की तैनाती कर रहे हैं ताकि ईरानी सरकार अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ किसी कार्रवाई की कोशिश के बाबत विचार न करें।

अमेरिका की सरकार ईरान पर परमाणु कार्यक्रमों को बंद करने के लिए निरंतर दबाव बना रही है। बीते माह अमेरिका ने ईरानी तेल खरीददारों को दी गयी रिआयत को खत्म करने का ऐलान किया था। बीते वर्ष अमेरिका ने साल 2015 में ईरान के साथ हुई परमाणु संधि को तोड़ दिया था और दोबारा सभी प्रतिबंधों को थोप दिया है।

अमेरिका ने ईरानी तेल को खरीदने ,चीन, तुर्की, दक्षिण कोरिया सहित आठ देशों को ईरान से तेल खरीदने की मात्र शून्य करने के लिए छह माह की मोहलत दी थी। अमेरिका ने धमकी दी कि बुशहर न्यूक्लियर पॉवर प्लांट के विस्तार नए प्रतिबंधों को बोता दे सकता है।

अमेरिका आक्रमक कार्रवाई बर्दाश्त नहीं करेगा

अमेरिका के राज्य विभाग के प्रवक्ता मॉर्गन ओरटागुस ने बयान में कहा कि “ईरान को सभी प्रसार संवेदनशील गतिविधियों पर रोक लगानी चाहिए। हम इस प्रसार का सहयोग करने वाली कार्रवाई को स्वीकार नहीं करेंगे। हम ईरान को भारी मात्रा में जल संरक्षित करने की भी अनुमति नहीं देंगे, जो उसकी मौजूदा मात्रा से काफी ज्यादा है।”

अमेरिका के 45 वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ लेने के बाद डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान प्रतिबन्ध थोपने के संकेत दे दिए थे। साल 2018 में आखिरकार उन्होंने जॉइंट कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ऑफ़ एक्शन से अमेरिका को बाहर निकाल लिया था जिसके तहत कुछ नियमो और शर्तो के अधीन ईरान अपने परमाणु मंसूबो को जारी रख सकता था।

अमेरिका के इस संधि को तोड़ने के बावजूद अन्य सदस्य फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन इस समझौता का हिस्सा है। ईरान ने अमेरिका के समक्ष समर्पण से इंकार कर दिया था और अमेरिकी प्रतिबंधों को आर्थिक आतंकवाद करार दिया था।

ईरान के विदेश मंत्री जावेद जरीफ ने कहा कि “वह ईरान की पॉलिसी में परिवर्तन के लिए ईरानी जनता पर दबाव बनाना  चाहते हैं। इस तरीके से अमेरिका ने 40 वर्षों तक व्यवहार किया था। डोनाल्ड ट्रम्प के सत्ता पर आने के बाद पूर्व राष्ट्रपति द्वारा किये वादे का उल्लंघन किया गया।”

ईरान ने धमकी दी कि अगर अमेरिका ने प्रतिबंधों को थोपने का प्रयास किया तो वह होर्मुज के जलमार्ग को रोक देंगे। यह रणनीतिक जलमार्ग विश्व के 20 फीसदी तेल को ट्रांसपोर्ट करने के लिए आवश्यक है। इसके आलावा रूस ने भी ईरान के साथ द्विपक्षीय रिश्तो को बरक़रार रखने का संकल्प लिया है।

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